# क्या हुआ कर्नाटक की राज्य सरकार ने 18 सितंबर 2026 को कैबिनेट बैठक में तटीय कर्नाटक में बोली जाने वाली भाषा तुलु को राज्य की दूसरी अतिरिक्त आधिकारिक भाषा का दर्जा देने का निर्णय लिया। यह घोषणा मंगलुरु में हुई कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने की। निर्णय विशेष रूप से दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों के लिए लागू बताया गया है।
# निर्णय का परिचय और संदर्भ तुलु सदियों से तटीय इलाकों में बोली जाती रही है और स्थानीय लोक-परम्पराओं, थिएटर और रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा रही है। इसके बावजूद तुलु को राज्य की आधिकारिक भाषाओं में शामिल नहीं किया गया था। अब यह फैसला उन दशकों पुरानी मांगों को पूरा करता है जो स्थानीय समुदाय और संबद्ध हिस्सों ने उठाई थीं।
# राजनीतिक पृष्ठभूमि
# प्रशासनिक और स्थानीय लागू होने के संकेत समाचार में बताया गया है कि तुलु को मान्यता देना एक बड़े पैकेज का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य तटीय इलाके की लंबित मांगों को पूरा करना है। इसके साथ ही सरकार ने दक्षिण कन्नड़ जिले के नाम को बदलकर 'मंगलुरु जिला' करने के लिए एक ड्राफ्ट अधिसूचना जारी करने का फैसला किया और आपत्तियां व सुझाव मांगे जाने का भी निर्णय लिया। यह संकेत देता है कि प्रशासनिक नियमों और नामांकन से जुड़े और कदम भी उठाए जा सकते हैं।
# क्या बदलेगा — तात्कालिक और संभावित असर बताए गए विवरण के अनुसार, यह मान्यता स्थानीय भाषा-समर्थन, सरकारी कागजी कार्रवाई और सांस्कृतिक मांगों के लिहाज से प्रतीकात्मक और प्रशासनिक दोनों मायनों में असर रखती है। मीडिया रिपोर्टें कहती हैं कि यह कदम उन समुदायों की दशकों पुरानी मांग को पूरा करता है जो तुलु बोलते हैं और यह क्षेत्रीय राजनीति पर भी प्रभाव डाल सकता है क्योंकि यह इलाका पारंपरिक रूप से बीजेपी का गढ़ रहा है।
# अगले कदम सरकार ने ड्राफ्ट अधिसूचना जारी कर सार्वजनिक प्रतिक्रिया मांगी है, खासकर दक्षिण कन्नड़ जिले के नाम बदलने से संबंधित निर्णय पर। आगे के नियम, कार्यान्वयन के निर्देश और प्रशासनिक बदलाव उसी प्रक्रिया के तहत तय होंगे।
# संक्षेप कर्नाटक सरकार ने 18 सितंबर 2026 को तुलु को दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों के लिए अतिरिक्त प्रशासनिक/आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया है। यह कदम स्थानीय मांगों और पुराने राजनीतिक वादों से जुड़ा हुआ है तथा प्रशासनिक नामकरण संबंधी अन्य बदलावों की भी राह खोलता है।